सुख

जीवन में असली या पूर्ण सुख नाम की कोई चिडिया  है  ही  नहीं | हर इन्सान उमर के किसी दौर में सुखी, तो किसी दौर में दुखी रहता है | अंतर  सिर्फ इतना है की कोई ज्यादा समय तक सुखी रहता है , कोई कम समय तक |सुखी या दुखी रहने के इस दौर की सीमा को बड़ाने या घटाने  में काफी हद तक हमारी सोच का हेर फेर काम करता है |       

पश्चाताप (GULTY)

किसी गलती को दुबारा न करने की भावना ही उस गलती के लिए किया गया सबसे बड़ा पश्चाताप है |     

मांग (Demand)

प्रभु से यह कहना कि हमे कुछ चाहिए ,अनुचित नहीं है | किन्तु यह अधिक विश्वाश की निशानी होगी यदि हम इतना ही कहें "है परमपिता मैं जानता हूँ कि आपको  मेरी  हर  आवश्कता  का  पहले से  पता है | अपनी  इच्छा  अनुसार  आप  मेरा  निर्वाह  करे | " कभी कभी प्रभु  हमारी छोटी छोटी प्राथ्नाओ  को अस्वीकार  कर  देते है  क्यूंकि वे हमें अधिक  अचछा  उपहार  देना चाहते  है | इश्वेर  में  अधिकाधिक  विश्वाश रखो | निश्चित मानो कि जिन्होंने तुम्हे रचा है , वे तुम्हारा पालन करेंगे ही | 

प्रयत्न (try)

असंभव कार्य वह  होता है जिसके लिए कभी सार्थक प्रयत्न नही किया गया 
मुश्किल कार्य वह होता है जिसके लिए कभी निरंतर प्रयत्न नही किया गया 


सच (saying truth)

सच बोलना और कम बोलना भी एक तरह  का तप है ,इससे वाणी  मे  उर्जा  का संचय  है | फिर किसी  को  दिए  हुए वरदान या शाप  का असर  इस  बात पर निर्भर करता है की उसकी  वाणी कितनी   उर्जावान   है